Wednesday, May 18, 2016
Thursday, May 12, 2016
खुद से भी रूठूँ तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं...!!
मै यादों का किस्सा खोलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
मै गुजरे पल को सोचूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मै देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
वो पल भर की नाराजगियाँ,
और मान भी जाना पलभर में,
अब खुद से भी रूठूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं...!!
Tuesday, May 10, 2016
यार से ऐसी यारी रख.
यार से ऐसी यारी रख
दुःख में भागीदारी रख,
चाहे लोग कहें कुछ भी
तू तो जिम्मेदारी रख,
वक्त पड़े काम आने का
पहले अपनी बारी रख,
मुसीबतें तो आएगी
पूरी अब तैयारी रख,
कामयाबी मिले ना मिले
जंग हौसलों की जारी रख,
बोझ लगेंगे सब हल्के
मन को मत भारी रख,
मन जीता तो जग जीता
कायम अपनी खुद्दारी रख ।
Saturday, April 30, 2016
माँ अगर कभी गुस्से मे गाली भी दे तो उसे उसका आशी्रवाद समझकर भूला देना चाहिए
पहली बार किसी गज़ल को पढ़कर आंसू आ गए ।
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शख्सियत, ए 'लख्ते-जिगर, कहला न सका ।
जन्नत,, के धनी "पैर,, कभी सहला न सका ।
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दुध, पिलाया उसने छाती से निचोड़कर,
मैं 'निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।
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बुढापे का "सहारा,, हूँ 'अहसास' दिला न सका
पेट पर सुलाने वाली को 'मखमल, पर सुला न सका ।
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वो 'भूखी, सो गई 'बहू, के 'डर, से एकबार मांगकर,
मैं "सुकुन,, के 'दो, निवाले उसे खिला न सका ।
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नजरें उन 'बुढी, "आंखों,, से कभी मिला न सका ।
वो 'दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।
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जो हर "जीवनभर" 'ममता, के रंग पहनाती रही मुझे,
उसे "त्यौहार" पर दो 'जोडे़, कपडे सिला न सका ।
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"बिमार बिस्तर से उसे 'शिफा, दिला न सका ।
'खर्च के डर से उसे बडे़ अस्पताल, ले जा न सका ।
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"माँ" के बेटा कहकर 'दम, तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ,
'दवाई, इतनी भी "महंगी,, न थी के मैं ला ना सका ।
माँ तो माँ होती है ...
भाईयों माँ अगर कभी गुस्से मे गाली भी दे
तो उसे उसका आशी्रवाद समझकर भूला देना चाहिए|✨,, ✨
Wednesday, April 27, 2016
उलझनों और कश्मकश में उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ …
उलझनों और कश्मकश में उम्मीद की ढाल लिए बैठा हूँ …
ए जिंदगी! तेरी हर चाल के लिए मैं दो चाल लिए बैठा हूँ |
लुत्फ़ उठा रहा हूँ मैं भी आँख – मिचौली का …
मिलेगी कामयाबी हौसला कमाल लिए बैठा हूँ l
चल मान लिया दो-चार दिन नहीं मेरे मुताबिक
गिरेबान में अपने ये सुनहरा साल लिए बैठा हूँ l
ये गहराइयां, ये लहरें, ये तूफां, तुम्हें मुबारक …
मुझे क्या फ़िक्र मैं कश्तियां और दोस्त बेमिसाल लिए बैठा हूँ…
तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर
तू जिंदगी को जी,
उसे समझने की कोशिश न कर
सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन,
उसमे उलझने की कोशिश न कर
चलते वक़्त के साथ तू भी चल,
उसमे सिमटने की कोशिश न कर
अपने हाथो को फैला, खुल कर साँस ले,
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर
मन में चल रहे युद्ध को विराम दे,
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर
कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे,
सब कुछ खुद सुलझाने की कोशिश न कर
जो मिल गया उसी में खुश रह,
जो सकून छीन ले वो पाने की कोशिश न कर
रास्ते की सुंदरता का लुत्फ़ उठा,
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर....
Tuesday, April 19, 2016
तोय कहे गतिशील गुजरात !
🔹गतिशील गुजरात !🔹
अधिकारी वगर ऑफिस चाले
सर्जन वगर होस्पिटल चाले
तोय कहे गतिशील गुजरात !
शिक्षक वगर शाळा चाले
लांच वगर फाईल न चाले
तोय कहे गतिशील.......!
पांच गाम वच्चे एक तलाटी
दस गाम वच्चे एक पोलिस
तोय कहे..............!
मंत्री पाणीनी जेम पैसो बहावे
खेडूत पाणी वगर पसिनो बहावे
तोय कहे...............!
सी.एम.- पी.एम. हवामां उडे
मजूर - खेडूत करजमां डूबे
तोय कहे...............!
उद्योगपतिना करज माफ करे
खेडूतोनी मिलकत साफ करे
तोय कहे...............!
पोताना कौभांड पोतानुं आयोग
पोताना नियमो पोताना निर्णयो
तोय कहे...............!
उद्योगोनी आयात करे
श्रमजीवीओना कांडा कापे
तोय कहे................!
पांच वर्ष सुधी कौभांडो करे
पंदर वर्ष सुधी तपास चलावे
तोय कहे.................!
कर्मचारीने कर्मवीर कही फूलावे
गुंडाओने कार्यकर बनावे
तोय कहे.................!
प्रजा माटे टेक्स वधारे
पोताना माटे पगार वधारे
तोय कहे गतिशील गुजरात !