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Thursday, May 12, 2016

खुद से भी रूठूँ तो, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं...!!

मै यादों का किस्सा खोलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.
मै गुजरे पल को सोचूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

अब जाने कौन सी नगरी में,
आबाद हैं जाकर मुद्दत से.
मै देर रात तक जागूँ तो ,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

कुछ बातें थीं फूलों जैसी,
कुछ लहजे खुशबू जैसे थे,
मै शहर-ए-चमन में टहलूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं.

वो पल भर की नाराजगियाँ,
और मान भी जाना पलभर में,
अब खुद से भी रूठूँ तो,
कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं...!!

Tuesday, May 10, 2016

यार से ऐसी यारी रख.

यार से ऐसी यारी रख
                दुःख में भागीदारी रख,
चाहे लोग कहें कुछ भी
                 तू तो जिम्मेदारी रख,
वक्त पड़े काम आने का
                 पहले अपनी बारी रख,
मुसीबतें तो आएगी
                 पूरी अब तैयारी रख,
कामयाबी मिले ना मिले
                जंग हौसलों की जारी रख,
बोझ लगेंगे सब हल्के
                मन को मत भारी रख,
मन जीता तो जग जीता
               कायम अपनी खुद्दारी रख ।         

                             

Monday, November 23, 2015

हर दोस्त "कोहिनूर" होता है।

पानी से तस्वीर
            कहा बनती है,
ख्वाबों से तकदीर
            कहा बनती है,
किसी भी रिश्ते को
            सच्चे दिल से निभाओ,
ये जिंदगी फिर
            वापस कहा मिलती है
कौन किस से
            चाहकर दूर होता है,
हर कोई अपने
            हालातों से मजबूर होता है,
हम तो बस
            इतना जानते हैं...
हर रिश्ता "मोती" और
            हर दोस्त "कोहिनूर" होता है।।।

Wednesday, November 18, 2015

चलो मिलने का कोई प्लान बनाते है

जिम्मेदारियां मजबूर कर देती हैं,
अपना "शहर" छोड़ने को !!

वरना कौन अपनी गली में,
जीना नहीं चाहता ।।।

हसरतें आज भी,
"खत" लिखती हैं मुझे,

बेखबर इस बात से कि,,
मैं अब अपने "पते" पर नहीं रहता !!!

एक वक्त ऐसा था..दोस्त बोलते थे-

"चलो,मिलकर कुछ प्लान बनाते हैं"

और अब बोलते है-
"चलो मिलने का कोई प्लान बनाते है"

Thursday, November 5, 2015

इसीलिए जमाने में दोस्त बनाता हूँ ।


रहता हूं किराये की काया में...
रोज़ सांसों को बेच कर किराया चूकाता हूं....
मेरी औकात है बस मिट्टी
जितनी...
बात मैं महल मिनारों की कर जाता हूं...

जल जायेगी ये मेरी काया ऐक दिन...
फिर भी इसकी खूबसूरती
पर इतराता हूं....
मुझे पता हे मैं खुद के सहारे कब्रिसतान तक भी ना जा सकूंगा...

इसीलिए जमाने में दोस्त बनाता हूँ ।