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Tuesday, January 31, 2017

आया वसंत आया वसंत

"आया वसंत आया वसंत,
छाई जग में शोभा अनंत,
पल में पतझड़ का हुआ अंत,
है आज मधुर सब दिग दिगंत,
इस सुख का हो अब नहीं अंत,
घर-घर में छाये नित वसंत।।
वसंत पंचमी के शुभ एवं पवित्र अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएँ।

Sunday, January 29, 2017

मैया तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए

💞मैया तेरे चरणों की, रज धूल जो मिल जाए
सच कहती हूँ मेरी, तकदीर बदल जाए
मैया तेरे चरणों की....

सुनते है तेरी रहमत, दिन रात बरसती है-२
एक बूँद जो मिल जाए, मन की कली खिल जाए
मैया तेरे चरणों की....

💞 ये मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूँ
जितना इसे समझाउँ, उतना ही मचलता है
मैया तेरे चरणों की....

💞नज़रों से गिराना ना, चाहे जितनी सज़ा देना
नज़रों से जो गिर जाए, मुश्किल ही सम्भल पाए
मैया तेरे चरणों की....

💞 मैया इस जीवन में, बस एक तमन्ना है
तुम सामने हो मेरे, मेरा दम ही निकल जाए
मैया तेरे चरणों की....

Wednesday, January 11, 2017

शिक्षक चालीसा


        शिक्षक चालीसा
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🙏🙏
             दोहा
शिक्षक ज्ञान का सागर, शिक्षक नाम महान।

शिक्षक ही बताते है, है जग में ज्ञान महान।।
👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼
जय जय जय शिक्षा के दाता।
सबको शुभ आशीष प्रदाता ।।1।।

अंधकार के तुम संहारक।
सकल ज्ञान के तुम्हीं प्रचारक ।।2।।

ज्ञान ज्योति को तुम्हीं जलाते।
अज्ञानी का ज्ञान बढ़ाते ।।3।।

मन में सुंदर भाव जगाते।
शिष्यों पर तुम प्यार लुटाते ।।4।।

भक्ति भाव का अलख जगाते।
नेक कर्म करना सिखलाते ।।5।।

चरित्रवान बनना सिखलाते।
मानव धर्म का पाठ पढ़ाते।।6।।

सद्भावों का ज्ञान कराते।
दुख को भी सहना सिखलाते।।7।।

सबके दुख को स्वयं मिटाते।
दीन दुखी को तुम अपनाते ।।8।।

लोभ-मोह को दूर भगाते।
शौर्य वीरता के गुण गाते ।।9।।

सकल विश्व में ज्ञान लुटाते।
शिक्षा का दीपक जलवाते ।।10।।

संयम से रहना सिखलाते।
सबको मुक्ति मार्ग दिखलाते ।।11।।

तुम्हीं हो सद्बुद्धि प्रदाता।
तुम्हीं हो हम सबके दाता ।।12।।

कर्मवान, गुणवान बनाते।
शिक्षा का अधिकार बताते ।।13।।

सुगम-अगम का भेद कराते।
भक्ति भाव का गुण सिखलाते ।।14।।

शिक्षा की सुगंध फैलाते।
दिग-दिगंत को तुम महकाते ।।15।।

देश-भक्ति का भाव जगाते।
भारत माँ पर जान लुटाते ।।16।।

अनपढ़ को विद्वान बनाते।
धर्म-धर्म का ज्ञान कराते ।।17।।

वेद और कुरान पढ़ाते।
शिक्षा की तुम ज्योति जलाते ।।18।।

सबको शिक्षा ज्ञान कराते।
शिक्षित कर विद्वान बनाते ।।19।।

तुम्हीं शिक्षा के उन्नायक।
एक तुम्हीं हो ज्ञान प्रदायक।।20।।

सही गलत का ज्ञान कराते।
शिक्षा का संकल्प दिलाते ।।21।।

देश प्रेम के तुम परिचायक।
एक तुम्हीं हो विश्व विधायक ।।22।।

तुम हो सकल ज्ञान के स्वामी।
सत्यपथ के तुम अनुगामी ।।23।।

तुम्हीं हो यश के अधिकारी।
तुम्हीं ज्ञान के परम पुजारी ।।24।।

सदा तुम्हारी जो यश गाते।
वो ही सकल ज्ञान को पाते  ।।25।।

तुम पर है हमको अभिमान।
तुम करते हो ज्ञान प्रदान ।।26।।

तुम्हीं हो शिक्षक विज्ञानी।
नहीं तुम्हारा जग में सानी ।।27।।

तुम्हीं हो राष्ट्र के निर्माता।
उज्जवल भविष्य मार्ग प्रदाता ।।28।।

ज्ञानोदय के तुम हो तपस्वी।
धीर-गंभीर तुम्हीं ओजस्वी ।।29।।

चहुँ दिश ज्ञान पुँज फैलाते।
भाईचारा प्रेम सिखाते ।।30।।

सफल-सबल, गतिवान बनाते।
सबमें करूणा भाव जगाते ।।31।।

श्रद्धा-सेवा के भाव जगाते।
ध्यान-योग का मार्ग बताते।।32।।

सादा जीवन को अपनाते।
निष्ठावान गुणवान बनाते ।।33।।

सबै मंगलकारी उपासक।
सभ्यता-संस्कृति के तुम गायक ।।34।।

अहिंसा-सहयोग सिखलाते।
प्रेम शांति मार्ग सुझाते ।।35।।

तुम्हरे बिना संसार अधूरा।
तुम ही करते इसको पूरा ।।36।।

सहनशीलता अपरम्पारा।
धरती सम तुम सदा उदारा ।।37।।

सुविचारों के तुम ही पोषक।
संयमित जीवन के उद्घोषक ।।38।।

आशावाद के तुम प्रदाता।
सुखमय राष्ट्र के तुम विधाता ।।39।।

हर युग में परताप तुम्हारा।
तुम से जग में उजियारा।।40।।
          
                दोहा
तुम ज्ञानी हो ज्ञान के, सबको देते ज्ञान।
इसीलिए गुरूवर तुम्हें, करते सभी प्रणाम।।

Sunday, January 8, 2017

_*भगवान तुमसे दूर नहीं।*_


         ; _*पावों में यदि जान हो*_
                     _*तो*_
        _*मंजिल तुमसे दूर नहीं।*_

        _*आँखों में यदि पहचान हो,*_
                     _*तो*_
          _*इंसान तुमसे दूर नहीं।*_

         _*दिल में यदि स्थान हो*_
                     _*तो*_
         _*अपने तुमसे दूर नहीं।*_

         _*भावना में यदि जान हो,*_
                    _*तो*_
         _*भगवान तुमसे दूर नहीं।*_

              

Wednesday, December 7, 2016

*आदमी की औकात !!!!!!*

*बिलकुल सत्य*

एक माचिस की तीली,
एक घी का लोटा,
लकड़ियों के ढेर पे
कुछ घण्टे में राख.....
बस इतनी-सी है
*आदमी की औकात !!!!*

एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया ,
अपनी सारी ज़िन्दगी ,
परिवार के नाम कर गया।
कहीं रोने की सुगबुगाहट  ,
तो कहीं फुसफुसाहट ,
....अरे जल्दी ले जाओ
कौन रखेगा सारी रात...
बस इतनी-सी है
*आदमी की औकात!!!!*

मरने के बाद नीचे देखा ,
नज़ारे नज़र आ रहे थे,
मेरी मौत पे .....
कुछ लोग ज़बरदस्त,
तो कुछ  ज़बरदस्ती
रो रहे थे।
नहीं रहा.. ........चला गया..........
चार दिन करेंगे बात.........
बस इतनी-सी है
*आदमी की औकात!!!!!*

बेटा अच्छी तस्वीर बनवायेगा ,
सामने अगरबत्ती जलायेगा ,
खुश्बुदार फूलों की माला होगी ......
अखबार में
अश्रुपूरित श्रद्धांजली होगी.........
बाद में उस तस्वीर पे ,
जाले भी कौन करेगा साफ़...
बस इतनी-सी है
*आदमी की औकात !!!!!!*

जिन्दगी भर ,
मेरा- मेरा- मेरा  किया....
अपने लिए कम ,
अपनों के लिए ज्यादा जिया ...
कोई न देगा साथ...जायेगा खाली हाथ....
क्या तिनका
ले जाने की भी
है हमारी औकात   ???

*ये है हमारी औकात*  फिर घमंड कैसा ?

Sunday, December 4, 2016

आहिस्ता चल जिंदगी

आहिस्ता  चल  जिंदगी,अभी
कई  कर्ज  चुकाना  बाकी  है
कुछ  दर्द  मिटाना   बाकी  है
कुछ   फर्ज निभाना  बाकी है
                   रफ़्तार  में तेरे  चलने से
                   कुछ रूठ गए कुछ छूट गए
                   रूठों को मनाना बाकी है
                   रोतों को हँसाना बाकी है
कुछ रिश्ते बनकर ,टूट गए
कुछ जुड़ते -जुड़ते छूट गए
उन टूटे -छूटे रिश्तों के
जख्मों को मिटाना बाकी है
                    कुछ हसरतें अभी  अधूरी हैं
                    कुछ काम भी और जरूरी हैं
                    जीवन की उलझ  पहेली को
                    पूरा  सुलझाना  बाकी     है
जब साँसों को थम जाना है
फिर क्या खोना ,क्या पाना है
पर मन के जिद्दी बच्चे को
यह   बात   बताना  बाकी  है
                     आहिस्ता चल जिंदगी ,अभी
                     कई कर्ज चुकाना बाकी    है
                     कुछ दर्द मिटाना   बाकी   है  
                     कुछ  फर्ज निभाना बाकी है !

Saturday, December 3, 2016

तेरे बिन एक पल ना रहूँ

☘🌹🍁☘🌹🍁

     ☘ साँवरिया   ☘
           मुज्ञे एेसी लगन
               तू लगा दे
      कि तेरे बिन एक पल
            ना रहूँ
    दिल में प्रेमवाला दीप
              जला दे
     कि तेरे बिन एक पल
            ना रहूँ
     तुने दिल काे चुराया
           मैंने कुछ ना कहा
     तुने बड़ा तड़पाया
           मैंने कुछ ना कहा
      अब एेसी तू एक
         ज्ञलक दिखा दे
     कि तेरे बिन एक पल
              ना रहूँ
     ☘ मेरे साँवरिया  ☘
 

Saturday, November 19, 2016

*मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिय।*

👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽

*-मैं भारत का नागरिक हूँ,*
*_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिये।*

*-बिजली मैं बचाऊँगा नहीं,*
*_बिल मुझे माफ़ चाहिये ।*

*-पेड़ मैं लगाऊँगा नहीं,*
*_मौसम मुझको साफ़ चाहिये।*

*-शिकायत मैं करूँगा नहीं,*
*_कार्रवाई तुरंत चाहिये ।*

*-बिना लिए कुछ काम न करूँ,*
*_पर भ्रष्टाचार का अंत चाहिये ।*

*-घर-बाहर कूड़ा फेकूं,*
*_शहर मुझे साफ चाहिये ।*

*-काम करूँ न धेले भर का,*
*_वेतन लल्लनटाॅप चाहिये ।*

*-एक नेता कुछ बोल गया सो*
*_मुफ्त में पंद्रह लाख चाहिये।*

*-लाचारों वाले लाभ उठायें,*
*_फिर भी ऊँची साख चाहिये।*

*-लोन मिले बिल्कुल सस्ता,*
*_बचत पर ब्याज बढ़ा चाहिये।*

*-धर्म के नाम रेवडियां खाएँ,*
*_पर देश धर्मनिरपेक्ष चाहिये।*

*-जाती के नाम पर वोट दे,*
*_अपराध मुक्त राज्य चाहिए।*

*-मैं भारत का नागरिक हूँ ,*
*_मुझे लड्डू दोनों हाथ चाहिय।*
👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽👌🏽

Wednesday, November 16, 2016

*पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गए ।*

*पहली बार किसी कविता को पढ़कर आंसू आ गए ।*😔😔

*दुध पिलाया जिसने छाती से निचोड़कर*
*मैं* *"निकम्मा, कभी 1 ग्लास पानी पिला न सका ।* 😭

*बुढापे का "सहारा,, हूँ* *"अहसास" दिला न सका*
*पेट पर सुलाने वाली को* *"मखमल,* *पर सुला न सका ।* 😭

*वो "भूखी, सो गई "बहू, के "डर, से एकबार मांगकर*
*मैं "सुकुन,, के "दो, निवाले उसे खिला न सका ।*😭

*नजरें उन "बुढी, "आंखों से कभी मिला न सका ।*
*वो "दर्द, सहती रही में खटिया पर तिलमिला न सका ।* 😔

*जो हर "जीवनभर" "ममता, के रंग पहनाती रही मुझे*
*उसे "दिवाली  पर दो "जोड़ी, कपडे सिला न सका ।* *😭*

*"बिमार बिस्तर से उसे "शिफा, दिला न सका ।*
*"खर्च के डर से उसे बड़े* *अस्पताल, ले जा न सका ।* 😔

*"माँ" के बेटा कहकर "दम,तौडने बाद से अब तक सोच रहा हूँ*,
*"दवाई, इतनी भी "महंगी,, न थी के मैं ला ना सका* । 😭

*माँ तो माँ होती हे भाईयों माँ अगर कभी गुस्से मे गाली भी दे तो उसे उसका "Duaa"* *समझकर भूला देना चाहिए*|✨,, ✨

*मैं  यह वादा करता  अगर यह पोस्ट आप दस ग्रुप मे भेजोगे तो कम से कम दो लड़के ईस पोस्ट को पढ कर अपनी माँ के बारे मे सोचेंगे जरुर!!!!!!!!* 😔

Wednesday, October 12, 2016

मंगल मैत्री

💐"मंगल मैत्री"💐

सबका मंगल सबका मंगल
          सबका मंगल होए रे।।
तेरा मंगल तेरा मंगल
          तेरा मंगल होए रे।।

इस धरती पे जितने प्राणी
          सबका मंगल होए रे।।
सबका मंगल सबका मंगल
          सबका मंगल होए रे।।

जल चर थल चर नभ चर
          सब जीवों का मंगल होए रे।।
सबका मंगल सबका मंगल
          सबका मंगल होए रे।।

दृश्य और अदृश्य
          सभी जीवों का मंगल होए रे।
सबका मंगल सबका मंगल
          सबका मंगल होए रे।।

सभी प्राणी सुखी रहें और
          सभी निराम़य होए रे।।
सबका मंगल सबका मंगल
          सबका मंगल होए रे।।

सबका मंगल हो
    सबका कल्याण हो
       सबकी स्वस्ति मुक्ती हो।।

Wednesday, September 21, 2016

आतंकी हमले के शहीदों को कोटि कोटि नमन

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये है?

माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है,

ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।

पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे,

टॉफियाँ खिलोने साथ में भी लाते थे।

गोदी में उठा के खूब खिलखिलाते थे,

हाथ फेर सर पे प्यार भी जताते थे।

पर ना जाने आज क्यूँ वो चुप हो गए,

लगता है की खूब गहरी नींद सो गए।

नींद से पापा उठो मुन्ना बुलाये है,

ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।

फौजी अंकलों की भीड़ घर क्यूँ आई है,

पापा का सामान साथ में क्यूँ लाई है।

साथ में क्यूँ लाई है वो मेडलों के हार ,

आंख में आंसू क्यूँ सबके आते बार बार।

चाचा मामा दादा दादी चीखते है क्यूँ,

माँ मेरी बता वो सर को पीटते है क्यूँ।

गाँव क्यूँ शहीद पापा को बताये है,

ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।

माँ तू क्यों है इतना रोती ये बता मुझे,

होश क्यूँ हर पल है खोती ये बता मुझे।

माथे का सिन्दूर क्यूँ है दादी पोछती,

लाल चूड़ी हाथ में क्यूँ बुआ तोडती।

काले मोतियों की माला क्यूँ उतारी है,

क्या तुझे माँ हो गया समझना भारी है।

माँ तेरा ये रूप मुझे ना सुहाये है,

ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।

पापा कहाँ है जा रहे अब ये बताओ माँ,

चुपचाप से आंसू बहा के यूँ सताओ ना।

क्यूँ उनको सब उठा रहे हाथो को बांधकर,

जय हिन्द बोलते है क्यूँ कन्धों पे लादकर।

दादी खड़ी है क्यूँ भला आँचल को भींचकर,

आंसू क्यूँ बहे जा रहे है आँख मींचकर।

पापा की राह में क्यूँ फूल ये सजाये है,

ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।

क्यूँ लकड़ियों के बीच में पापा लिटाये है,

सब कह रहे है लेने उनको राम आये है।

पापा ये दादा कह रहे तुमको जलाऊँ मैं,

बोलो भला इस आग को कैसे लगाऊं मैं।

इस आग में समा के साथ छोड़ जाओगे,

आँखों में आंसू होंगे बहुत याद आओगे।

अब आया समझ माँ ने क्यूँ आँसू बहाये थे,

ओढ़ के तिरंगा पापा घर क्यूँ आये थे ।
😌😌😌😌😌😌😌
आतंकी हमले के शहीदों को कोटि कोटि नमन
💐💐💐💐💐💐💐

Saturday, September 17, 2016

Jag mein sacho tero naam

Jag mein sacho tero naam,
Hey ram hey ram.

Tu hi mata, tu hi pita hai,
Tu hi to hai radha ka shayam,
Hey ram..

Tu hi bigade, tu hi savare,
Iss jag ke sare kaam,
Hey ram..

Tu antaryami sab ka swami,
Tere charno mein charo dhaam,
Hey ram..

Tu hi jagdata, vishwa vidhata,
Tu hi subah tu hi shaam,
Hey ram..

mane Lalo Dikhae che

Lyrics: Sacha Satsang maaye

Sacha Satsang maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che

Sacha Satsang maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Sacha Satsang maa
ho ji re mhane lalo dikhae che

Lalo Dikhae mhane Lalo Dikhae che
Lalo Dikhae mhane Lalo Dikhae che

Bhakti na rang maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Bhakti na rang maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Sacha Satsang maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Sacha Satsang maa
ho ji re mhane lalo dikhae che

Hastinapur Gaao che ne Kaurav naaraz che
Hastinapur Gaao che ne Kaurav naaraz che
Hastinapur Gaao che ne Kaurav naaraz che
Hastinapur Gaao che ne Kaurav naaraz che

Draupadi na cheer maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Draupadi na cheer maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Sacha Satsang maaye
ho ji re mhane lalo dikhae che
Sacha Satsang maa
ho ji re mhane lalo dikhae che

Monday, September 5, 2016

श्रीगणेश चौथ


"रिद्धि दे, सिद्धि दे,
वंश में वृद्धि दे, ह्रदय में ज्ञान दे,
चित्त में ध्यान दे, अभय वरदान दे,
दुःख को दूर कर, सुख भरपूर कर, आशा को संपूर्ण कर,
सज्जन जो हित दे, कुटुंब में प्रीत दे,
जग में जीत दे, माया दे, साया दे, और निरोगी काया दे,
मान-सम्मान दे, सुख समृद्धि और ज्ञान दे,
शान्ति दे, शक्ति दे, भक्ति भरपूर दें..."

आप और आपके परिवार को  श्रीगणेश चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं।

Saturday, September 3, 2016

शिक्षक गाथा

"शुक्र है शिक्षक हूँ"

"शुक्र है शिक्षक हूँ"

नेता नहीं, एक्टर नहीं, रिश्वत खोर नहीं,
शुक्र है शिक्षक हूँ , कुछ और नही...

न मैं स्पाइसजेट में घूमने वाला गरीब हूँ,
न मैं किसी पार्टी के करीब हूँ...

कभी राष्ट्रीयता की बहस में मैं पड़ता नहीं...
मैं जन धन का लूटेरा या टैक्स चोर नहीं,
शुक्र है शिक्षक हूँ कुछ और नहीं...

न मेरे पास मंच पर चिल्लाने का वक्त है ,
न मेरा कोई दोस्त अफज़ल , याकूब का भक्त है...
न मुझे देश में देश से आज़ादी का अरमान है,
न मुझे 2 - 4 पोथे पढ़ लेने का गुमान है..

मेरी मौत पर गन्दी राजनीति नहीं, कोई शोर नही,
शुक्र है शिक्षक हूँ, कुछ और नही ...

मेरे पास मैडल नही वापस लौटाने को,
नक़ली आँसू भी नही बेवजह बहाने को...
न झूठे वादे हैं, न वादा खिलाफी है,
कुछ देर चैन से सो लूँ इतना ही काफी है...

बेशक खामोश हूँ, मगर कमज़ोर नही,
शुक्र है शिक्षक हूँ कुछ और नही..0

मैं और सड़क एक जैसे कहलाते हैं
क्योंकि हम दोनों वहीं रहते है
लेकिन सबको मंजिल तक पहुँचाते हैं,
रोज़ वही कक्षा, वही बच्चे, पर होता मैं कभी बोर नहीं,
शुक्र है शिक्षक हूँ ... कुछ और नहीं.

Wednesday, August 10, 2016

*तू क्यों परेशान है*

खुदा तो रिज़क देता है
               कीड़ो को पत्थर में

तू क्यों परेशान है
               हीरे मोती के चक्कर में

उड़ जा आसमान में
               या लगा गोता समन्दर में

तुझे उतना ही मिलेगा
               जितना है तेरे मुकद्दर में

अपनी अंधेरी कब्र को
खुद ही रोशन करने की तय्यारी करले

ए इंसान

आज जिन्दो से कोई वफा नही करता
कल मुर्दो के लिए कोन दुआ करेगा

आईना कुछ ऐसा बना दे ""ए खुदा""

जो चेहरा नहीं नीयत दिखा दे

कदर करनी है
तो जीते जी करो

जनाजा उठाते वक्त तो
नफरत करने वाले भी रो पड़ते है

जिन आँखों को सजदे में
             रोने की आदत हो

वो आँखें कभी अपने
             मुक्कदर पर रोया नहीं करती.

कमाई तो जनाज़े के दिन पता चलेगी

दौलत तो कोई भी कमा लैता हे

ज़माना जब भी मुझे मुश्किल मे डाल देता है.
मेरा ख़ुदा हज़ार रास्ते निकाल देता है....

जमाना आज भी उसकी मिसाल देता है
नेकिया कर के जो दरिया में डाल देता है

अपनी भूख का इलज़ाम उस खुदा को ना दे
वो माँ के पेट में भी बच्चे को पाल देता हैं

Tuesday, July 19, 2016

*आज गुरु पुर्णिमा पर एक कविता*


वो कौन सा है पद ,
जिसे देता ये जहाँ सम्मान ।
वो कौन सा है पद ,
जो करता है देशों का निर्माण ।
वो कौन सा है पद ,
जो बनाता है इंसान को इंसान ।
वो कौन सा है पद ,
जिसे करते है सभी प्रणाम ।
वो कौन सा है पद ,
जिकसी छाया में मिलता ज्ञान ।
वो कौन सा है पद ,
जो कराये सही दिशा की पहचान ।
गुरू है इस पद का नाम ।
मेरा सभी गुरूजनो को शत-शत प्रणाम ।

Tuesday, July 5, 2016

*सातवें वेतन आयोग की सौगात- आ कविता एक वार जरूर वांचो*


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     सातवें वेतन आयोग की सौगात
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किसी को चुपड़ी चार मिली है
                   किसी को केवल भात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
                     ये   कैसी  सौगात  मिली

लम्बा अरसा बीत गया
                        इस वेतन की तैयारी में
जैसे कोई सजनी देख रही
                     साजन की बाट अटारी में
लेकिन जब साजन आये तो
                      आँखों  से  नीर बहाया है
ये कैसी वेतन वृद्धि है कोई
                   समझ  नहीं  कुछ  पाया  है
है यही तुम्हारे अच्छे दिन तो
                     इनको  वापिस  ले  जाओ
केवल इतिहास को दोहरा कर
                   बस  वेतन  वृद्धि  दे  जाओ
मन करता छोड़ नौकरी को
                     मैं भी अब चाय बनाऊँगा
फिर मोदी जी की तरह एक दिन
                        घूम  विदेश  में आऊँगा
चाँद पूर्णिमा का आया है
                  या  फिर  काली  रात  मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
                       ये  कैसी  सौगात  मिली

अरुण जेटली जी तुमने ये
                     कैसा  नियम  निकाला  है
वेतन वृद्धि ही गलफांस बना
                    जैसे कोई विषधर काला है
सड़कों पर जाने को तुमने
                      अब कैसी ये मजबूरी की
वेतन वृद्धि दी सबको या
                         सबको बस मजदूरी दी
इतिहास को शर्मसार करके
               उन साठ साल को भुला दिया
मर भी न सकें जी भी न सकें
                इस मीठे जहर को पिला दिया
कोई चाहे कुछ भी बोले 
                     मेरे मन बस में एक पीड़ा है
ये वेतन वृद्धि नहीं ऊँट के
                         मुँह  में  थोड़ा  जीरा  है
विश्वास बहुत था लोगो पर
                        ये तो केवल घात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
                         ये  कैसी सौगात मिली

वेतन वृद्धि नहीं मिले बस
                       इतना काम करा दो तुम
आटे दाल  के भावों को बस
                        फिर से आधे ला दो तुम
हर कर्मचारी के बच्चों को
                 अच्छी शिक्षा दिलवा दो तुम
रहने को आवास सभी को
                   बिना शुल्क मिलवा दो तुम
रेलगाड़ी  के  डिब्बे  में
                  जनरल डिब्बे बढ़वा दो तुम
A C बस में सफर कर सके
                  मासिक  पास  बना  दो  तुम
इतने काम करा दो सबको
                        तब समझेंगे दिन अच्छे
कर्मचारी भी खुश होंगे
                    कहलाओ हितैषी तुम सच्चे
वादे पूरे कर तो या फिर
                        समझेंगे बस बात मिली
सातवें वेतन की मोदी जी
                       ये  कैसी  सौगात  मिली!!